नया कोई रिश्ता पैदा क्यों करें
बिछड़ने तक गिला क्यों करें।
तुम हमको दफ़ा क्यों करो
हम तुमको दफ़ा क्यों करें।
आज आई हो तो सुन लो
आगे फिर हम मिला न करें।
पहले कभी हम कह न सके
अब भला कह कर क्या करें।
जा रही हो तो यह सुन जाओ
पलट के हमको सताया न करें।
अब मिलना तो बताना ज़रूर
रातों में हम करें तो क्या करें।
-हर्ष वर्धन सिंह
Amazing one 👏👏 Deep thought
ReplyDeleteThank you
DeleteAll hearts.!!!
ReplyDeleteThank you
DeleteNice one
ReplyDeleteNice sir
ReplyDeleteThank you
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