समुन्दर
गौर किया है कभी?
गौर किया है कभी?
समुन्दर कितना अकेला है!
वो जो लहरों का गीत हैं न
वो गीत नहीं पुकार है उसकी।
पुकार जो वो लगाता है तुमको।
कभी अकेले बैठे उसके किनारे?
हरदम कुछ कहता है समुन्दर
वो जो पानी बहकर छूता है
वो इशारा है साथ होने का
वो जो तेज़ लहर के झोंके हैं
वादा है, आँसू पिरोने का
गौर किया है कभी?
-हर्ष वर्धन सिंह
Bahut khoob
ReplyDeleteThank you
Delete❤️❤️❤️
ReplyDeleteThank you
Delete💓☝🏻👌🏻👌🏻
ReplyDeleteLast few lines, you were picking. Should've waited more. It was coming. Priceless last 4 lines.
ReplyDeleteThank you I'll work on that.
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