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शाम कि चाय

शाम की चाय


मैं कभी आँक नहीं पाया
कि मुझे तुमसे
कितना प्रेम है।
प्रेम है भी
या नहीं?
मुझे बस इतना विश्वास है,
जब मन
पीड़ा से भर जाएगा।
या फिर
हर कुछ
ज़िन्दगी में
निराधार हो जाएगा।
तब भी
मैं
शाम की चाय
तुम्हारे बिना नहीं
पी पाऊँगा।


© हर्ष वर्धन सिंह

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