Skip to main content

पुरानी चीज़ें | हर्ष वर्धन सिंह


पुरानी चीज़ें


मोहब्बत है मुझे
पुरानी तस्वीरों से,
पुराने गानों से,
पुरानी यादों से,
मुझे अपनी हर उस चीज़ से मोहब्बत है,
जो अब पुरानी हो चली है।
एक उम्र गुज़ारी है मैंने उनके साथ।
मेरा कैमरा, मेरी ऐनक, मेरी घड़ी
मेरा ग्रामोफ़ोन, मेरी कुर्सी,
मेरी प्रेमिका से ज़्यादा,
मुझे अकेला इन सबने देखा है।
जब मैं एकांत में बैठा संगीत सुनता हूँ।
देखा है,
जब घंटों मैं, अपनी कुर्सी पर ख़्याल बुनता हूँ।
देखा है,
ऐनक लगाए, शायरी लिखते हुए मुझे।
देखा है,
खिड़की से बारिश को कैमरे में समेटते हुए।
देखा है,

कैसे इनको ख़ुद से दूर कर दूँ?
कैसे मैं रफ़्तार पकड़ लूँ?

मैंने ज़िन्दगी के तमाम मुश्किल दिन
बिताये हैं, अपनी इन चीजों के साथ
तभी
मोहब्बत है मुझे
हर उस चीज़ से जो पुरानी हो चली है।


© हर्ष वर्धन सिंह

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

गुज़रता वक़्त | हर्ष वर्धन सिंह

गुज़रता वक़्त अब जो तुम नहीं हो तो अक्सर सोचता हूँ मैं, कि जितनी कोशिशें कीं तुम्हे रोक लेने की क्या वो काफ़ी थी? अक्सर यूँ फ़ोन मिलाना, बेवक़्त बातें बनाना, यूँ मिलने की गुजारिश करना क्या काफ़ी थी? सोचा तो लगा हाँ, काफ़ी थी! काफ़ी थी, वो सारी कोशिशें तुम्हे कुछ और पल रोकने के लिए आखिर, गुज़रे वक़्त कि तरह लोग भी ज़िन्दगी से हो कर गुज़र ही जाते हैं। -©हर्ष वर्धन सिंह तस्वीर: दी नेमसेक (2006)