बातें बनाना आता ही नहीं
दो बातें हमसे, करिये तो।
दिल हमारा बेहेलता ही नहीं
दिल लगी ज़रा, करिये तो।
यूँ तो हम हर हाल जी लें
आप शिरकत, करिये तो।
हम तो हर सफ़र पे चल दें
पहल ज़रा सी, करिये तो।
-हर्ष वर्धन सिंह
-हर्ष वर्धन सिंह
लेखक और कवि जैसी ज़िम्मेदारी अभी मैं उठा नहीं सकता, यहाँ मैं सिर्फ़ अपने ख़यालों को लिख भर देता हूँ, जो कभी कविता का रूप ले लेती हैं, कभी कहानी का। पढ़ें और उन सबको पढ़ाएँ जिनको इन कविताओं कहानियों की ज़रूरत है।
Bahot khub
ReplyDeleteDhanyawaad
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